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vakya ke kitne bhed hote hain – वाक्य के कितने भेद होते हैं

Vakya ke kitne bhed hote hain: नमस्कार, दोस्तों आपका एक बार फिर से Yourhindi.net में स्वागत है, आज इस लेख में हम मुख्य रूप से वाक्य किसे कहते हैं और वाक्य के कितने भेद होते हैं उन सभी को उदाहरणों के साथ एक-एक करके समझ गए. चलो शुरू करते हैं

वाक्य

वाक्य:- दो या दो से अधिक पदों के सार्थक समूह को, जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहते हैं।

वह पद समूह जिससे श्रोता को वक्ता के अभिप्राय का बोध हो।

उदाहरण– ‘सत्य की विजय होती है।’

वाक्यांश

वाक्यांश: शब्दों के ऐसे समूह को जिसका अर्थ तो निकलता है किन्तु पूरा पूरा अर्थ नहीं निकलता, वाक्यांश कहते हैं।

उदाहरण- ‘दरवाजे पर’, ‘कोने में’, ‘वृक्ष के नीचे’ आदि का अर्थ तो निकलता है किन्तु पूरा पूरा अर्थ नहीं निकलता इसलियेये वाक्यांश हैं।

वाक्य के अंग

वाक्य के दो अंग होते हैं –

  • उद्देश्य
  • विधेय

जिसके बारे में बात की जाय उसे उद्देश्य कहते हैं और जो बात की जाय उसे विधेय कहते हैं।

उदाहरण के लिए – ‘मोहन प्रयाग में रहता है। इसमें उद्देश्य है – ‘मोहन’ , और विधेय है – ‘प्रयाग में रहता है।’

अर्थ के आधार पर आठ प्रकार के वाक्य होते हैं

  1. विधान वाचक वाक्य
  2. निषेधवाचक वाक्य
  3. प्रश्नवाचक वाक्य
  4. आज्ञावाचक वाक्य
  5. विस्म्यादिवाचक वाक्य
  6. इच्छावाचक वाक्य
  7. संकेतवाचक वाक्य
  8. संदेहवाचक वाक्य।

1.विधान वाचक वाक्य – वह वाक्य जिससे किसी प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है, वह विधानवाचक वाक्य कहलाता है।

उदाहरण- भारत एक देश है।
राम के पिता का नाम दशरथ है।
दशरथ अयोध्या के राजा हैं।

2.निषेधवाचक वाक्य – जिन वाक्यों से कार्य न होने का भाव प्रकट होता है,उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं।

जैसे-
मैंने दूध नहीं पिया।
मैंनेखाना नहीं खाया।

3.प्रश्नवाचक वाक्य – वह वाक्य जिसके द्वारा किसी प्रकार प्रश्न किया जाता है, वह प्रश्नवाचक वाक्य कहलाता है।
उदाहरण-
भारत क्या है?
राम के पिता कौन है?
दशरथ कहाँ केराजा है?

4.आज्ञावाचक वाक्य – वह वाक्य जिसके द्वारा किसी प्रकार की आज्ञा दी जाती है या प्रार्थना किया जाता है, वह विधिसूचक वाक्य कहलाता हैं।
उदाहरण-
बैठो।
बैठिये।
कृपया बैठ जाइयो
शांत रहो।
कृपया शांति बनाये रखें।

5.विस्मयादिवाचक वाक्य – वह वाक्य जिससे किसी प्रकार की गहरी अनुभूति का प्रदर्शन किया जाता है, वह विस्मयादिवाचक वाक्य कहलाता हैं।
उदाहरण-
अहा! कितना सुन्दर उपवन है।
ओह! कितनी ठंडीरात है।
बल्ले! हम जीत गये।

6.इच्छावाचक वाक्य – जिन वाक्यों में किसी इच्छा, आकांक्षाया आशीर्वाद का बोध होता है, उन्हें इच्छावाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण- भगवान तुम्हें दीर्घायु करे। नववर्ष मंगलमय हो।

7.संकेतवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में किसी संकेत का बोध होता है, उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण-
राम का मकान उधर है।
सोनु उधर रहता है।

8.संदेहवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में संदेह का बोध होता है, उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं।
उदाहरण-
क्या वह यहाँ आ गया ?
क्या उसने काम कर लिया ?

रचना के आधारपर वाक्य के भेद

रचना के आधार पर वाक्य के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं।

1.सरल वाक्य/साधारण वाक्य –

इन वाक्यों में एक ही विधेय होता है, उन्हें सरल वाक्य या साधारण वाक्य कहते हैं, इन वाक्यों में एक ही क्रिया होती है;

जैसे- मुकेश पढ़ता है।
राकेश ने भोजन किया।

2.संयुक्त वाक्य –

जिन वाक्यों में दो-या दो से अधिक सरल वाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों से जुड़े हों, उन्हें संयुक्त वाक्य
कहते है।

जैसे- वह सुबह गया और शाम को लौट
आया। प्रिय बोलो पर असत्य नहीं।

3.मिश्रित/मिश्र वाक्य

जिन वाक्यों में एक मुख्य या प्रधान वाक्य हो और अन्य आश्रित उपवाक्य हों, उन्हें मिश्रित वाक्य कहते हैं। इनमें एक मुख्य उद्देश्य और
मुख्य विधेय के अलावा एक से अधिक समापिका क्रियाएँ होती हैं,

जैसे- ज्यों ही उसने दवा पी, वह सो गया। यदि परिश्रम
करोगे तो, उत्तीर्ण हो जाओगे। मैं जानता हूँ कि तुम्हारे
अक्षर अच्छे नहीं बनते।

[FAQ] वाक्य पर पूछे जाने वाले सवाल

अर्थ के आधार पर आठ प्रकार के वाक्य होते हैं

  1. विधान वाचकवाक्य
  2. निषेधवाचकवाक्य
  3. प्रश्नवाचकवाक्य
  4. विस्म्यादिवाचकवाक्य,
  5. आज्ञावाचकवाक्य,
  6. इच्छावाचकवाक्य,
  7. संकेतवाचक वाक्य,
  8. संदेहवाचक वाक्य।

रचना के आधारपर वाक्य के आठ तीन भेद के वाक्य होते हैं

  1. सरल वाक्य/साधारण वाक्य
  2. संयुक्त वाक्य
  3. मिश्रित/मिश्र वाक्य

वाक्य के दो अंग होते हैं -

  • उद्देश्य
  • विधेय

जिसके बारे में बात की जाय उसे उद्देश्य कहते हैं और जो बात की जाय उसे विधेय कहते हैं।

उदाहरण के लिए - 'मोहन प्रयाग में रहता है। इसमें उद्देश्य है - 'मोहन' , और विधेय है - 'प्रयाग में रहता है।'

उपवाक्य के भेद-उपवाक्य के दो भेद हैं :

  • प्रधान उपवाक्य
  • आश्रित उपवाक्य

प्रधान उपवाक्य- जो उपवाक्य पूरे वाक्य से पृथक होकर भी अपना स्वतन्त्र एवं पूर्ण अर्थ रखता है उसे प्रधान उपवाक्य कहते हैं।

जैसे-'मैं जानता हूँ कि वे मेरे मित्र हैं।' इस वाक्य में मैं जानता हूँ '- प्रधान उपवाक्य है।

आश्रित उपवाक्य- जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के बिना अपना अर्थ स्पष्ट नहीं कर सकता वह 'आश्रित उपवाक्य' कहलाता है। आश्रित उपवाक्य अर्थ के लिए वस्तुतः प्रधान उपवाक्य पर आश्रित रहता है।

जैसे-'मैं जानता हूँ कि वे मेरे मित्र हैं 'में 'वे मेरे मित्र हैं' - आश्रित उपवाक्य

रचना के आधार पर वाक्य के निम्नलिखित तीन भेद होते हैं।

  • सरल वाक्य/साधारण वाक्य
  • संयुक्त वाक्य
  • मिश्रित/मिश्र वाक्य

निष्कर्ष:

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