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Top 50 Paryayvachi Shabd (synonyms) in Hindi

हेलो मित्रों हमारी वेबसाइट पर आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है और आज हमने हिंदी में Paryayvachi Shabd लिखे हैं।

Paryayvachi Shabd meaning in Hindi

Paryayvachi Shabd meaning in Hindi

पर्यावाची शब्द का क्या होते हैं देखिए पर्यावाची यानी किसी शब्द भी का दूसरा नाम होता है जो कि वही अर्थ देता उसे पर्यावाची कहा जाता है।

जी हां दोस्तों पर्यावाची शब्द ही अपने आप में बड़े ही कठिन है आप सभी को पता है । कि पर्यायवाची को हम दूसरे नाम से भी जानते हैं। दूसरा नाम क्या है। समानार्थी समाज अर्थ रखने वाला शब्द जब हम बात करते हैं। किसी एक शब्द के बारे में वही शब्द दूसरी बोली या दूसरी भाषा में किसी और नाम से जाना जाता है।

तो हम उन दोनों शब्दों को आपस में पर्यायवाची कहते हैं। हमारे हिंदी भाषा में हमें पर्यायवाची याद करना इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि हमारी हिंदी भाषा की बोलियां बहुत है बहुत सारी बोलियां है।

ठीक है पर आज हमने ऐसे पर्यायवाची शब्द लिखे हैं जो की परीक्षा में बहुत बार पूछे गए हैं चलिए शुरू करते हैं।

Paryayvachi Shabd

वृक्ष – तरु, पादप, पेड़, अगम, विटप, द्रुम।
कमल – जलज, सरोज, अब्ज, पंकज, तामरस, नलिन, सरसिज, अम्बुज, शतदल।
ऑग – जातवेद, हुताशन, कृशानु, वैश्वानर, दहन, वायुसखा, पावक, अनल।
चन्द्रहास- कृपाण, तलवार, असि, करवाल, खड्ग।
आशय – सारांश, अर्थ, अभिप्राय, तात्पर्य, मतलब।
फल – परिणाम, नतीजा, अंजाम।
सुन्दर – चारु, ललित, रम्य, रमणीक, मनोहर, सुहावना, रुचिर।
शशांक – चाँद, चंद्र, शशि, निशाकर, कलानाथ, सोम, विधु, द्विराज, राकापति, तारकेश्वर।
मेह – निकेतन, भवन, सदन, आगार, आयतन, आवास, निलय, धाम, गृह।

यमुना – कृष्णा, सूर्यसुता, अर्कजा, सूर्यतनया, कालिन्दी।
करण – मरीचि, दीप्ति, मयूख, रश्मि, कर, अंशु।
सरिता – निम्ना, तटिनी, तरंगिणी।
कमल – इन्दीवर, नलिन, सरोज, राजीव, सरसिज, शतदल।
जीभ – जिह्वा, रसना, रसज्ञा, रसिका, चंचला।
अहि – उरग, सरीसृप, पवनाश, सर्प, नाग, भुजंग, पनग, नैसर्गिक – प्राकृतिक, स्वाभाविक, वास्तविक।
हाथ – हस्त, पाणि, कर, बाहु।
सूर्य – दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, आदित्य, दिनेश।
लहर – तरंग, वीचि, हिलोर, उर्मि।
चाँदनी – चन्द्रातप, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रिका, चन्द्रकला, अमृततरंगिणी, चाँदनी।

सरस्वती – भारती, वीणापाणि, महाश्वेता इला, वागीश, ब्राह्मी, गिरा, निधात्री, वागेश्वरी, शारदा।
जनार्दन – विश्वम्भर, नारायण, अच्युत, चक्रपाणि, मुकुन्द, गरुड़ध्वज, लक्ष्मीपति, जलशायी, चतुर्भुज।
समुद्र – पयोधि, जलधि, वारिधि, उदधि, सिन्धु, पयोनिधि, नीरनिधि, अब्धि, जलधाम, वारीश, अर्णव, रत्नाकर, पारावार।
देवता – देव, अमर, सुर, निर्जर, त्रिदश, अमर्त्य, अजर।
शिव – महेश, महादेव, रुद्र, शम्भू, उमापति, शंकर, आशुतोष, मदनारि, चन्द्रमौलि, त्रिपुरारि।
बगीचा – आराम, वाटिका, उपवन, उद्यान, बाग, फुलवारी, निकुंज
तुरंग – बाजि, घोटक, घोड़ा, रविसुत, हय, सैंधव, अश्व।
विडोजा – कौशिक, देवराज, वज्रधर, शक्र, पुरंदर, मधवा, शचीपति, सुरपति।
मार – केतन, अनंग, मन्मथ, मनसिज, मनोभव, मयन।
रात – तमिस्त्रा, निशा, रजनी, निशीथ, विभावरी, रैन।

मृगेन्द्र – केसरी, नाहर, मृगराज, व्याघ्र, सिंह, हरि, वनराज, केसरी।
षट्पद – मधुकर, षट्पद, अलि, ग, मधुराज, मधुभक्षा।
मछली – मत्स्य, मीन, सफरी, झष, जलजीवन, जलतोरि।
यमुना – कालिन्दी, अर्कजा, रवितनया, कालगंगा, कृष्णा,
निशीथ – रात्रि, रजनी, निशा, विभावरी, रैन।
सूर्य – मार्तण्ड, सविता, भानु, भास्कर, आदित्य।
अरविन्द – उत्पल, कोकनद, इन्दीवर, पद्म, नलिन, सरोज।
बिजली – दामिनी, चंचला, तड़ित, चपला।
पाँची – पूर्व।
तरंग – उर्मि, लहर, वीचि।

जंगल – कान्तार, अरण्य, कानन, विपिन, वन, अटवी।
क्रोध – अमर्ष, रोष, कोप।
अर्जुन – पार्थ, धनञ्जय, भारत, गुडाकेश, गांडीवधारी।
अशव – घोड़ा, घोटक, हय, बाजि, तुरंग।
अचला – पृथ्वी, धरा, वसुधा, वसुन्धरा, महि, धरती।
आँख – दृग, लोचन, चक्षु, नेत्र, दृष्टि, नयन, अक्षि।
आम – आम, रसाल, पिकवल्लभ, फलश्रेष्ठ, सहकार, अमृतफल,पिकप्रिय, पियम्बु, पिकबन्धु।
आँसू – अश्रु, नयननीर, नयनजल, नेत्रवारि।
आदित्य – सूर्य, रवि, भानु, प्रभाकर, दिवाकर, भास्कर
आकाशगंगा – मंदाकिनी, नभगंगा, सुरनदी, नभोनदी।
कबूतर – कपोत, पारावत, रक्तलोचन, हारीत, परेवा।

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