Hindi Poems

Best 30+ Hindi Poems on Love

हेलो दोस्तों आज हमने आपके लिए Hindi Poems on Love यानी की प्यार पर हिंदी कविताएँ लिखे हैं जीने आप हमारी साइट पर आकर पढ़ सकते हैं

स्वागत है आप सभी का हमारी वेबसाइट साइट shayarireaders.in में और आज इसके अन्दर हम आपको बताने वाले हैं सबसे बढ़िया हिंदी कविताएँ प्यार पर जो कि बहुत ही ज़्यादा मज़ेदार होगे क्योकि इनकी लेंथ बहुत ज़्यादा बड़ी होने वाली आप सभी का दिल से दोबारा स्वागत करते हैं।

क्यों प्यार मानव जीवन के लिए बहुत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण है

कई अलग-अलग प्रकार के प्यार, रोमांटिक प्रेम, माता-पिता का प्यार, भाई-बहन का प्यार है, यह वह गोंद है जो हम सभी को एक साथ रखता है और जीवन को जीने लायक बनाता है।

प्यार भी प्यार होने के बारे में है इसलिए प्यार प्राप्त करना और उसे वापस देना। प्यार को हर कोई जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक मानता है और इसलिए खुशी प्यार और प्रेमी दोनों होने के लिए बेहद जुड़ी हुई है।

Best Hindi Poems on Love

लेकिन क्या वास्तविक कारण हैं कि प्यार मानव जीवन के लिए इतना शक्तिशाली और महत्वपूर्ण क्यों है, हम कुछ सबसे मौलिक पर एक नज़र डालते हैं।

[Read more About importance of Love in Hindi]

चलो शुरू करते हैं


Hindi Poems on Love

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

आंखों से दूर दिल के करीब था, मैं उसका और वो मेरा नसीब था,
न कभी मिला न कभी जुदा हुआ, रिश्ता हम दोंनो का कितना अजीब था.

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

मैं उठ जाऊँ गर तो फिर गिरा देना मुझे,
कि भूल न जाऊँ अपनी जमी की मिट्टी को।

Hindi Poems on Love

[1]

तुझ सी हैं ये रंग बिरंगी कविताएं अंबर पर जैसे बरखा की बदरा
छाए अंधेरों में भी जीने की आस जगाए मैं अल्हड़ थोड़ी
पागल तेरे नाम से छनक उठती है पिया मेरी ये पायल बिंदिया
कंगन झुमके पिया हैं ये सब तेरे कायल
नदिया मैं,सागर तू तुझ में समां जानें को पिया मैं तो बेकल
सामने बस तू हो खुशियां भी हरसू हों मीठी सी एक गुफ्तगू हो

[2]

हमने जिन से दिल लगाया उसी ने हमें दगा दिया
, बीच मझधार में छोड़ बहुत अच्छा सजा दिया
प्यार मोहब्बत सब कुछ खिलवाड़ था उनका
कैसे कहूं कैसा प्यार था उनका, तूप्यार समझ
ना पाई बिना गलती का मुझे हर बार गलत ठहराई
उन्होंने बहुत गिराया मुझको मैंने उनको गिराऊँगा
अब अब भूल कर भी कभी उनसे दिल ना लगाउँगा
अब अब भूल कर भी कभी उनसे दिल ना लगाउँगा
दिग्विजय

[3]

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी
है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है
हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है
सभी का खून है शामिल यहाँ की
मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है
राहत इन्दौरी

[4]

रहना चाहता हूँ
पलको में तुम्हारी महसूसू करना चाहता हूँ खामोशियों को तुम्हारी
तुम्हारे दिल में जिस तरह लिखा मेरा नाम है
ठीक उसी तरह हमें भी तुमसे प्यार है
, सुकून इस तन्हा दिल को तरी यादों
से ही आता है कुछ इस तरह ये दीवाना तम्हे पागलों सा चाहता है

Best Hindi Poems on Love

[5]


मैं अच्छी हूं
मंअच्छी हु बहुत अच्छी हू,उन्होंने आज फिर ये फरमाया है।
लगता है उन्हें कुछ काम याद आया है।
मां कहती थी मुझे ,पर समझ आज मुझे आया है।
ये रिश्ते नाते न यारी होती किसी की,
सब के होते हुए भी,खुद को अकेला ही तो मैने पाया है।
उन्होंने आज फिर मुझ पर प्यार बरसाया है,
लगता है उन्हें कुछ काम याद आया है।

[6]


वो चाँद ही नहीं जिसमे तेरा चेहरा ना हो
की वो चाँदहीनही जिसमे तेरा चेहराना हो
वो गाली ही नहीं जिसमे आशिको का
पहरा ना हो मैं अपने दुश्मनों को भी
जंग के बाद गले लगाता हूँ तेरी बेवफाई
का घाव कहि इससे गहरा ना

[6]


हो सके तो मुझे कभी छोड़ कर मत जाना
क्योकि मुझे तुम्हारी जरूरत है और
खिर कल मुझे ऐसा प्यार करने वाला
कहाँ मिलेगा हाँ शायद मैं भी
तुमसे प्यार किया करता हूँ हाँ
पर वैसा नही जैसे तुम मुझसे किया करते हो

[7]

पुरानी होकर भी खास होती जा रही है
मोहब्बत बेशर्म है जनाब बेहिसाब होती जा रही है।

[8]

किसी और के करीब नहीं जाता है
क तुझी पे प्यार आता है कोई
मोहब्बत का नाम लेता है तो तेरा
ही ख्याल आता है अपनों से ज्यादा
मैं तुझ पर ऐतबार करता हूं तुझे
एहसास भी नहीं है मैं तुझसे कितना प्यार करता हूं

[9]

एक गलतफहमी सी होने लगी थी
, हवाएं मानों मेरी हर उम्मीद होने लगी थी ये बदलता मौसम था या उसका हममें होना,
ये इश्क़ था या उसका आदत होना,
तब जमीं को आसमां में उमड़ते बादलों से सैकड़ो आस होने लगी थी,
वहीं मैं उसके इरादों में महफूज होने लगी थी
, वह था बड़ा ही खुशगवार मौसम,
इश्क हमदोनों को हुआ है, तब ये गलतफहमी सी होने लगी थी…
. वह लिखता था नाम मेरे, मैं उसको गाने लगी थी,
मतलब में था वो शायद, मैं उसकी होने लगी थी,
वो दुनिया से लड़ रहा था, मैं सपने सजाने लगी थी,
बड़ी मासूम थी उन दिनों मैं,
उसके वायदों कों आयत समझने लगी थी,
वो दिल में बस रहा था और मैं खुद से ही दूर होने लगी थी।
मिल जाएंगे एक रोज हम, तब ये ग़लतफ़हमी होने लगी थी।
– सन्नी कुमार अद्विक

Hindi Poems on Love

[10]

कभी तेरे होठों की मुस्कान बनकर तो, कभी तेरी आँखों का
काजल बनकर !! कभी तेरे चेहरे का
नूर बनकर तो, कभी तेरे दिल की धड़कन बनकर,
आऊंगा तेरे मज़हब का बनकर !

[11]


मेघ का उत्पात थोड़ी देर देकर जल का फुहार फिर लिया अपना दामन सम्हाल
देखो मेघ का उत्पात! लोगों के आस का खिल्ली उड़ाता कभी दर्शन दे बार्रबार
छिप जाता पौधे का मुरझाया पात-पात कभी गरज भर कर रह गया, कभी बरस बरस कर भर गया,
डूबा नदी का किनार। कोसी का बहाव सब बाँध तोड़ा गाँव का गॉव जलमग्न हुआ
इतना हुआ बरसात किसान का भविष्य मेघपर आश्रित मेघ की ईच्छा पूर्णत: अप्रत्याशित हर साल का अनिश्चित अनुपात

[12]

मुश्किल वक्त का सबसे
बड़ा सहारा है,
“उम्मीद” जो एक प्यारी सी मस्कान देकर कानों में धीरे
से कहती है, “सब्र रख सब अच्छा
ही होगा”

[13]

मैं साहिल पर लिखी हुई इबारत नहीं, जो लहरों से मिट जाये !
मैं बारिश की बरसती बूंद नहीं, जो बरस के थम जाये !!
मैं कोई ख्वाब नहीं, जिसे देख कर भुला दिया जाये !
मैं हवा का झोंका नहीं, कि आया और गुज़र गया !!
मैं चाँद नहीं, जो रात के बाद ढल गया !
मैं तो वो एहसास हूँ!
जो तुझ में लहू बन कर गर्दिश करे !! मैं वो रंग हूँ!
जो तेरे दिल पर चढ़ा रहे तो कभी ना उतरे !!
__ मैं वो गीत हूँ, जो तेरे लबों से कभी जुदा ना होगा!
मैं तो वो परवाना हूँ, जो जलता रहेगा पर उफ़ तक नहीं करेगा !!
ख्वाब, इबारत, हवा की तरह, चार बूंद शमा की तरह !
मेरे मिटने का सवाल ही नहीं !!
क्योंकि मैं मुहब्बत हूँ !!

Hindi Poems on Love

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Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

तुझे क्या पता !!
तेरे इंतज़ार में हमने हर लम्हां कैसे गुजारा है…
एक दो बार नहीं !! दिन में हजारों दफ़ा तेरी तस्वीरों को निहारा है ….

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

बातों ही बातों में मन की, मन को भा जाते हो, कुछ तराने अलग से, मेरे मन में जो गा जाते हो…
पता नही क्यों जुबान साथ नही देती मेरा, जब सामने कभी मेरे तुम आ जाते हो…!!!

Hindi Poems on Love

[1]

वो रात
बातों बातों में जो ढली होगी वो रात कितनी मनचली होगी
तेरे सिरहाने याद भी मेरी रात भर शम्मां-सी जली होगी
जिससे निकला है आफ़ताब मेरा
वो तेरा घर तेरी गली होगी
दोस्तों को पता चला होगा दुश्मनों-सी ही खलबली होगी
सबने तारीफ़ तेरी की होगी मैं चुप रहा तो ये कमी होगी
तेरी आँखो में झाँकने के बाद लड़खड़ाऊँ तो मयक़शी होगी
है तेरा ज़िक्र तो यकीं है मुझे मेरे बारें में बात भी होगी
— अभिज्ञात

[2]

तुझपरही मरते रहे हैं हम,
और तुझको ही अपना बनाना है…
जानता हूँ रंग होते हैं खुशी बिखेरने के लिए
, पर मुझे तेरीसादगी का रंगही लगाना है…
कटती नहीये अँधेरीसर्द रात,
सुबह होते ही चाँद को भी जगाना है…
तू कहे तोसुबह को शाम कर दूं मैं,
परयाद रखना तेरा भी कोई दीवाना है…
दोस्त बैठे हैं महफिल में लोगों की तरह,
तेरा साथ न होना तो बस एक बहाना है…
छुपजाता हूँ मैं रोज़ तुझे देखकर,
मेरा बचपना नही, ये प्यार में शरमाना है…
लोग मिलते हैं बिछड़ते हैं लोगों की तरह
, तुझेपाकर अपनी किस्मत को बताना है…
कीये तेरा आशिक कोई नया नहीं है,
ये पागल तो ज़माने से भी पुराना है….!

[3]

आदत तुम आदत बन गए हो इस दिल की
सुबह शाम दिन रात मधुर लय हर धडकन
की एक तुम्हारी आदत ने मेरी दुनिया बदल
दी एक तुम्हारी आदत ने मेरी जिंदगी बदल दी।
सिर्फ पागलपन नहीं है ये, सिर्फ प्यार भी नहीं
तुम्हारी आदत है सर्वोपरि मनमें कहीं मनकी
गहरी इच्छा कहूँ या कहूँ इसे पूजा पर तुम्हारी
आदत से अच्छा नहीं कुछ दूजा तुम्हारी आदत
नहीं है केवल मेरी कविता कहानी
ये आदत बन गई है अब दीवानगी रूहानी


[4]

हमारी अधूरी कहानी
किस्से है, इसे तुम हमारी अधूरी कहानी न समझना….
ये तो बस आईना है अच्छे पलो का, इसे तुम समय की बर्बादी न समझना…
चंद अल्फ़ाज़ जो ज़ुबान पर है उसे कह देना,
उसे अपने सीने में दफ़न कर खुद को सयानी न समझना…
चलो “इश्क” है तो बया कर दो यु “राब्ता – ए – गुफ्तगू” कर इसे दोस्ती न समझना….
कर रहा हूँ इजहार तुमसे हर वो बात इशारे में
, इसे तुम हमारी “हर्फ़ – ए – ग़ज़ल”न समझना….
किस्से है, इसे तुम हमारी अधूरी कहानी न समझना…….

Hindi Poems on Love

[5]
जिन्दगी के रुवाब” र पूँ जिन्दगी के ख्वाब दिखागपा कोई
मुस्कराके अपना बना गया कोई बहती हुपी हवाओं की
पूँणामलेगपाकोई साबन में आफै कीपल कागील सना
गपाकोई पं अपने पार की हवा से गमकी मिटागपाकोई
मि सपनो में आके अपना बनागपा कोई अज लगी किताब
के पन्ने पलटगा कोई उस मैं सुरखे हुप गुलाब की पादाथिबागपाकोई
जिन्दगी में फिर से पार की बरसातदेगपा कोई बिना जाहर
के इस दिल मेंजगह बनागपाकोई में फिर से मुझे जीने
का मकसद सिला गा कोई
किन आरट अपना बनागपाको “
मुकेश चौहान

[6]

जब लिखो कहानी मेरी, तो कुछ यूं लिखना….
अपनी काली रात का हिसाब जब लिखो,
मेरे बहे काजल का जज़्बात भी लिखना।
सिर्फ अपनी बेचैनी का क़िस्सा मत लिखना,
मेरी बड़ती घटती साँसों का हिस्सा भी लिखना ।
सिर्फ अपने डर का एजहार मत लिखना,
मेरा टूट कर करना प्यार भी लिखना ।।
सिर्फ अपने मज़ारों के डेरे मत लिखना,
मेरे व्रत और मन्नत के फेरे भी लिखना ।
नाराज़गी से जब लिखो मेरा गुरुर सीता सा,
मत भूलना मेरा जपना तेरा नाम मीरा सा।
जिस्म और रूह के बीच की सॉसों की क़ब्र लिखो तब,
इश्क़ की तासीर और मेरा सब्र भी लिखना ।
जब लिखो कहानी हमारी, तो कुछ यूँ लिखना

[7]

चोरी
प्रेम इस तरह किया जाए। कि प्रेम शब्द का कभी जिक्र तक न हो
चूमा इस तरह जाए कि होंठ हमेशा ग़फ़लत में
रहें तुमने चूमा या मेरे ही निचले होंठ ने
औचक ऊपरी को छू लिया
छुआ इस तरह जाए कि मीलों दूर तुम्हारी
त्वचा पर हरे-हरे सपने उग आएँ
तुम्हारी देह के छज्जे के नीच मुँहअँधेरे
जलतरंग बजाएँ
रहा इस तरह जाए कि नींद के
भीतर एक मुस्कान तुम्हारे चेहरे पर रहे
जब तुम आँख खोलो, वह भेस बदल ले
प्रेम इस तरह किया जाए कि दुनिया का कारोबार
चलता रहे किसी को ख़बर तक न हो कि प्रेम हो गया
92/ न्यूनतम मैं

[8]


सोचता हूँ, “के कमी रह गई शायद कुछ या जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं
, अरे मुहबत की क्या मैं नुमाईश करता मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था” । “सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था”,

[9]

मुझे अपने हर दर्द का हमदर्द बना लो,
दिल में नहीं तो ख्यालों में बैठा लो,
सपनों में नहीं तो आंखों में सजा लो,
अपना एक सच्चा अहसास बना लो।।
मुझे कुछ इस तरह से अपना लो,
कि अपने दिल की धड़कन बना लो,
मुझे छुपा लो सारी दुनिया ऐसे
, कि अपना एक गहरा राज बना लो ।।
करो मुझसे मोहब्बत इतनी,
अपनी हर एक चाहत का अंजाम बना लो,
ढक लो मुझे अपनी जुल्फों इस तरह,
कि मुझे अपना संसार बना लो ।।
आप फूल बन जाओ मुझे भंवरा बना लो,
आप चांदनी बन जाओ मुझे चाँद बना लो,
रख दो अपना हाथ मेरे हाथों में इस तरह,
कि मुझे अपने जीवन का हमसफर बना लो ।।

[10]

“मुझे अपनी जान बना लो,
अपना अहसास बना लो,
मुझे अपने अल्फाज़ बना लो
, अपने दिल की आवाज बना लो,
बसा लो अपनी आँखों में मुझे अपना ख्वाब बना लो,
मुझे छुपा लो सारी दुनिया से अपना एक गहरा राज बना लो,
आज बन जाओ मेरी मोहब्बत और मुझे अपना प्यार बना लो….”


Hindi Poems on Love

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

दर्द हर बार यु ही नहीं होता, बिना कुछ बताए तेरा जाना, एक

पहेली सुलझाने जितना आसान नहीं होता।

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

। प्रेम मेरे पुरखों की आंखों का
आंसू था जो बिना गिरे ही उनकी चिताओं
में जल गया। ~पूनामा अरोड़ा

Hindi Poems on Love

जो मिला मुसाफिर वो रास्ते बदल डाले दो कदम पे थी मंज़िल फासले बदल डाले
आसमाँ को छूने की कूयतें जो रखता था आज है यो विखरा सा हौसले बदल डाले
शान से मैं चलता था कोई शाह कि तरह आ गया हुँदर दरपेकाफिले बदल डाले
फूल बनके वो हमको दे गया चुभन इतनी काँटों से है दोस्ती अब आसरे बदल डाले
इश्क ही खुदा है सुन के शी आरज़ आई खूब तुम खुदा निकले वाकिये बदल डाले

[2]


देखो ना चाँद साथ कैसे चलता है मेरी तरह ये भी तुम पर मरता है
सितारे जो टटे तेरे दामन मे गिरे इक तारा इसी आरजू मे गिरता है
मैं इक शायर नहीं भिखारी हूँ कटोरा लिए जाने ये कटोरा अपने आप कैसे भरता है
मैं लफ्ज़ – लफ्ज़ बिखर जाऊँ इक दिन
जो इश्क़ करता है वो कहाँ मरता है।
मैंने उस बच्चे के बियाबां आँखों को देखा है जो अब भी अपने बाप का इंतज़ार करता है

[3]

कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ क्या तुम लाई हो चितवन में, क्या तुम लाई हो चुंबन में,
अपने कर में क्या तुम लाई, क्या तुम लाई अपने मन में,
क्या तुम नूतन लाई जो मैं फिर से बंधन झेलूँ कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ
अश्रु पुराने, आह पुरानी, युग बाहों की चाह पुरानी,
उथले मन की थाह पुरानी, वही प्रणय की राह पुरानी,
अर्थ्य प्रणय का कैसे अपनी अंतर्ध्वाला में लूँ कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ
नभ के सूनेपन से खेला, खेला झंझा के झर झर से तुम में आग नहीं है तब क्या,
संग तुम्हारे खेलूँ कैसे भेंट तुम्हारी ले लूँ
खेल चुका मिट्टी के घर से, खेल चुका मैं सिंधु लहर से,

[4]

पंच जीवन का चुनौती दे रहा है हर कदम पर,
आखिरी जिल नहीं होती कहीं भी वृष्टिगोचर
, धूलि से लट, सेल से सिंच, हो गई है देह भारी,
कौन-सा विश्वास मुझको खींचत जाता निरंतर?
पंथ क्या, पथ की थकन क्या,
खेद काव्या. दोनयर मेरी पलीक्षा में खड़े है!
एकभी संदेश आशा का नहीं देते सितारे,
प्रकृति ने मंगल शकुन प्य में नहीं मेरे संधारे,
विश्व का उत्साहवर्दक शक भी मैंने सुना कन,
किंतु बढ़ा जा रहा है. राज्य पर किसके सहारे!
विश्व की अवहेलना न्या,
अपशकुन ब्या. दोनयर मेरी प्रतीक्षा में खड़े हैं!
पास रहा है पर पहुंचना लक्ष्य पर इसका अनिश्चित,
कर्म कर भी करफरल में यदि रहा यह पंथ मचित विश्व तो उस पर हंसेगा
. खुन भूला. खून पटका! किंतु गा यह पंक्तिया वो बह करेगा धैर्य सचित ।
थर्थ जीवन, सार्थ जीवन
की लगन वया, दोनयन मेरी प्रतीक्षा में खड़े है?
अब नहीं उस पार का भी भय मुझे कुछ भी सताता,
उस तरफ के लोक ने भी जुड़ चुका है एक नाता,
में उसे भूला नहीं ते वह नहीं भूली मुझे भी,
मृत्यु पथ पर भी बलूगा नोट से यह गुनगुनाता
अन्त यांचन, अन्त जीवन
का. मरण बधा दोनयर मेरी पतीक्षा में खड़े हैं!

Hindi Poems on Love

[5]

प्यार की वो बातें, मेरे दिल में आ गयीं.
तुझ संग जो गुज़ारे पल, उनकी खुशबू छा गयी.
प्यार की वो बातें, मेरे दिल में आ गयीं.
पर फिर भी आज हर पल अकेले हैं, तेरे बिना सनम, किस्मत के खेल हैं.
जो तू नहीं, तो मेरी ख़ुशी, जो खिली थी तब,
अब मुरझा गयी. प्यार की वो बातें, मेरे दिल में आ गयीं.
तेरी यादों से ही, मेरा दिल ये रोशन है, सासें ये कहती हैं, मिलने का मौसम है.
जिस पल में तू मुझसे दूर थी, तेरे लौट आने की, उसमे आस आ गयी.
प्यार की वो बातें, मेरे दिल में आ गयीं. तुझ संग जो गुज़ारे पल, उनकी खुशबू छा गयी.

[6]

हार गए हम मनाते-मनाने हार गए हैं
हम एहसास जगाने में नाकाम रहे
हम चाहा तो जाँ से ज्यादा
तुझे पर तेरे जिद के आगे हार गए हम।
कोशिशें बहुत की,
कि मिट जाए दूरिया तोड़ सारी बंदिशें
अब मिल जाए हम पर हो गई सारी
कोशिशें बेकार आखिर
तेरे जिद के आगे हार गए हम।।
किए कई जतन,
मनाने का हर-एक प्रयत्न फिर भी
तेरा गुरूर ना हुआ कम
अमीरी तेरा आज दिखलाया हैं
तेरे झूठे वादें पर हार गए थे हम
चल आज कर ही लेते ये स्वीकार
तुझे कभी था ही नहीं हमसे प्यार
तभी इतनी वफा निभा कर तन्हा रह गए
हम हाँ हाँ तेरे जिद के आगे हार गए हम।

[7]

तुम अकेले हो हम तनहा है ।
कभी मिले थे आज कहां हैं क्या हाल है तुम्हारे ? थोड़ा बयान तो करो
कहो दुबारा उन परियों की कहानी बितायी थी
जिसमें हमने जवानी क्या तुम भूल गए सब कुछ?
पूछो खुद से ,थोड़ा ना तो करो।
खामोश लब मुस्कुरा लेंगे दोबारा जी लेंगे
वह पल हम फिर सहारा मेरे सवालों की
तुम ही राहबहरो मान जाओ, थोड़ा हां तो करो ।
गम को हटाकर जरा इश्किया सागर तो देखा
मन को समझा कर थोड़ा दूरियां बाहर तो फेंको
दिल के प्याले को चलो थोड़ा भरो मोहब्बत के
दिलवाले को थोड़ा बयान तो करो

[8]

_ मेरी जिंदगी, एक पतग जैसी, परिस्थितियों की हवा में बहती हुई , एक असीम, अनन्त, अविचल भटकन, तेरा प्यार, एक डोर जैसा, __ मेरे भटकाव को दिशा देता हुआ,
एक नम्र, निर्भय, निश्चल नियंत्रण,
आज वो डोर ढीली है, और मैं कहीं दूर हूँ, पता है मुझे, पर
जब भी तू चाहेगी,
खींच लेगी ये डोर, पास बुला लेगी अपने, मुझे

[9]


मोहब्बत के मोहल्लों में, अनजान निगाहें मिलती हैं।
क़त्ल सरेआम होता हैं, जब कली राग की खिलती हैं।।
दलदल हैं चाहत ‘मानस’, जो पड़े वो निकल न पाते हैं।’
गहराती और जाती यादें, जितना भूलना चाहते हैं।।

[10]

मेरे साथ ये क्या हो गया
कोई आज मेरे खुदा हो गया लाखो चेहरे घूमते है,
आस पास मेरे पर उसी का चेहरा मुझे याद हो गया।
हर चेहरे मे दिखता है, वो। मुझे लगता है,
मैं भी उसके जैसा हो गया मन्दिर,
मस्जिद जाने का दिल नहीं करता
अब मेरा ‘उसको देखने भर से ही मेरा मक्का हो गया ।
प्यार उसका जिंदगी के जैसा जिंदगी
मेरी का अब वो हर पल हो गया आंखे उसकी मानो इबादत खुदा की
खुदा का जैसे वो घर हो गया
‘मोहोब्बत मेरी से अंजान वो उसको क्या पता,
वो किसी के लिये क्या हो गया
बताने से उसको डर लगता है मुझे वो मुझे से कहीं नाराज़ हो गया

Hindi Poems on Love


बड़ी हिम्मत दी है तेरे इश्क ने –
प्यार केलसर्पछीको कभी उड्नीपतदिना
-दीपांशु गहलौत

Best Poems on Love in Hindi-हिन्दी में प्यार पर सबसे अच्छा कविताएं

निगाहों से क़त्ल कर डालो,
न हो तकलीफ दोनों को, तुम्हें खंजर उठाने की हमें
गर्दन झुकाने की..


Hindi Poems on Love

प्यार पर हिंदी कविताएँ

सत्य कहती हो तुम इंदु, तुम्हारा हैं जायज़ अभिमान।
देख पनपे काव्य उर में, तुम्हारे तो लाखों हैं कांत।।

अगर किसी दिन रोना आये
तो आ जाना मेरे पास …. हँसने का वादा तो नही करता मगर रोउंगा जरूर तेरे साथ ..!


हमारे प्रेम की शान पर, सर्वस्व न्योछावर स्नेहा! तुम्हारे सरल अभिमान पर,,
वचन ये तुमको दिया! मृत्यु के ग्रास मे भी,
कमी न होगी मुस्कान पर, कविता से..


मैं वक़्त नहीं जो बदल जाऊँ मैं वो शाम हूं
, जो रोज़ लौट कर आऊँ बन चुका हूं,
दर्द अब मैं तेरे दिल का जब जब सोचेगा मेरे बारे मैं तब तब बढता जाऊँ ….
…. मुझे आम ना कर तू अपनी महफिल मे


मैं राज़ बनकर तेरे दिल मे दफन हो |
जाऊँ…….
अकेला ना समझना तू खुद को इस जहाँ मे मैं तेरा साया हूँ,
कोई बादल नहीं जो बरसकर लौट जाऊँ ……

तुम्हारे ख़्वाबो का हमें …
आसरा मील गया हैं.. तुम्हारे एहसास ने हमें ….
मंजिल दिखा दिया हैं… तुम्हारे इश्क ने हमें
अपना बना लिया हैं ….
प्यार की शुरुआत
इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी,
ढूंढ रहे थे हम जिन्हें उन से बात हो गयी
, देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम,
वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।


Hindi Poems on Love

Essay on love, short essay on love in Hindi (691 words)

Love is a passion for which we all yearn. We crave love from the day we are born. Young children who enter this world are unaware of what happens here. If there is one thing they understand, it is love. They understand nothing more than love and longing. They want to stay with their parents and grandparents longer because they can feel in love with their touch and behavior Hindi Poems on Love .

The mother and child relationship is the strongest. The only reason for this is love. It involves immense love. The mother loves the child selflessly and later receives this love. As we grow up, we make friends get acquainted with teachers, relatives, neighbors, and many others. What is it that draws or reprimands us? This is his nature. A kind and loving person is loved by all Hindi Poems on Love.

For example, a teacher who is loving and supporting is loved by students, while one who is rude does not like anyone. Likewise, we love relatives who love us and treat us well. We look forward to meeting them and feeling happy in their company.

Thus, love is the basis of every relationship. A place where people love each other is peaceful and beautiful

Preface:
Love and affection are often used together. Both of these are necessary to build a long-lasting relationship. Relationships in which love and affection as well as other things like mutual trust, honesty, and care are the best relationships. These feelings are necessary not only for romantic relationships but also to strengthen family bonds and friendships Hindi Poems on Love.

Difference between love and affection:
Love and affection are two distinct emotions, although they often overlap. While affection can be defined as a choice by the other person because of the qualities that have/have love, it is a deep feeling. Hindi Poems on Love To love a person means to accept them with all their vice and qualities. This includes taking care of them and standing with them while they are thick and thin.

True love is selfless and pure. It does not ask for anything in return. However, a relationship where the flow of giving and receiving love is equal lasts longer and is more satisfying.
Show off required for affection relations:

Just as love is necessary to build a long-lasting relationship, so is affection. Love without love can make any relationship dull and lifeless. Showing affection to another person is very important. This is true for every relationship. This is the key to a happy relationship. For example, parents love their children. They sacrifice and selflessly carry out their duties and responsibilities towards their children towards them.

However, paying only the school fees of the children, buying clothes for them, and cooking for them is not enough. Children also need love and affection. To develop a strong parent-child bond, it is necessary to spend time with them, listen to them, pay attention to them, and make them feel loved.

Conclusion:
Where there is love there is affection and where there is affection there is scope for the penetration of love. Love and affection often coincide and depend on each other. Both are essential to complete love and relationship Hindi Poems on Love.

Preface:

Love is the basis of happy family life. It brings family members closer to each other and forms a strong bond. It is natural for us to have a natural love among our family members. This love grows over time or relationships are bitter, depending largely on how well the elders of the family nurture their children.

Parent and child relationship:

The parent-child bond is one of the deepest and strongest bonds. This is because it is based on pure love. Parents love their children with all their hearts. On the other hand, children feel closest to their parents. They cannot imagine their life without their parents.

Parents help and support their children at every step in life. They can be strict with their children and sometimes scold them. However, it is for the good of their children. All these feelings are born out of love Hindi Poems on Love.

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