Hindi Poems

Best 30+ Hindi Poems on father

हेलो दोस्तों आज हमने आपके लिए Hindi Poems on father यानी की पिता पर हिंदी कविताएँ लिखे हैं जीने आप हमारीसाइट पर आकर पढ़ सकते हैं

स्वागत है आप सभी का हमारी वेबसाइट साइट shayarireaders.in में और आज इसके अन्दर हम आपको बताने वाले हैं सबसे बढ़िया पिता पर हिंदी कविताएँ मे जो कि बहुत ही ज़्यादा मज़ेदार होगे क्योकि इनकी लेंथ बहुत ज़्यादा बड़ी होने वाली आप सभी का दिल से दोबारा स्वागत करते हैं।

Importance of father in Hindi पिता का महत्व

पिता, माता की तरह, एक बच्चे की भावनात्मक भलाई के विकास में स्तंभ हैं। बच्चे नियमों को लागू करने और उन्हें लागू करने के लिए अपने पिता को देखते हैं। वे शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह की सुरक्षा की भावना प्रदान करने के लिए अपने पिता को भी देखते हैं।

बच्चे अपने पिता पर गर्व करना चाहते हैं, और एक शामिल पिता आंतरिक विकास और शक्ति को बढ़ावा देता है। अध्ययनों से पता चला है कि जब पिता स्नेह और समर्थन करते हैं, तो यह बच्चे के संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास को बहुत प्रभावित करता है। यह भलाई और आत्मविश्वास की समग्र भावना भी पैदा करता है।


Hindi Poems on father पिता पर हिंदी में कविताएँ

प्यारे पापा सच्चे पापा.
बच्चों के संग बच्चे पापा करते हैं पूरी हर इच्छा,
मेरे सबसे अच्छे पापा

पापा का है प्यार अनोखा जैसे शीतल हवा का झोंका
माँ की ममता सबसे प्यारी सबसे सुंदर सबसे न्यारी


Heart touching poems on father in Hindi

1. पिता
मेरा साहस मेरी इज्जत मेरा सम्मान है पिता।
मेरी ताकत मेरी जी मेरी पहचान है पिता ।।
घर की इक-इक ईट में शामिल उनका खून-पसीना ।
सारे घर की रौनक उनसे सारे घर की शान पिता ।।
मेरी इज्जत मेरी शोहरत मेरा सतबा मेरा मान है पिता।
मुझको हिम्मत देने वाले मेरा अभिमान है पिता ।।
सारे रिश्ते उनके दम से सारे नाते उनसे है।
सारे घर के दिल की धड़कन सारे घर की जान पिता ।।
शायद ख ने देकर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का।
उसकी रहमत उसकी बेअमत उसका है वरदान पिता ।।

2.पिता
का गौरव तो पिता घर का अस्तित्व होते हैं।
पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है।
दोनो समय का भोजन माँ बनाती है तो जीवन भर व्यवस्था करने वाले पिता को हम सहज
ही भूल जाते गी जो ठोकर या चोट तो “ओ माँ” ही मुंह से निकलता रास्ता पार करते कोई
ट्रक पास आकर ब्रेक लगा ” यही मुंह से निकलता है।
क्योंकि छोटे छोटे संकटो के लिए माँ हैं पर बडे संकट आने पर पिता ही याद आते हैं।
5 पट वृक्ष हैं जिसकी शीतल छाँप में सम्पूर्ण परिवार रहता है।

3.पापा हर फर्ज निभाते हैं, – जीवन भर कर्ज चुकाते हैं बच्चे की एक ख शी के लिए,
अपने सुख भूल ही जाते हैं फिर क्यों ऐसे पापा के लिए, बच्चे कुछ कर ही नहीं पाते
ऐसे सच्चे पापा को क्यों, पापा कहने में भी सकुचाते पापा का आशीष बनाता है, बच्चे का जीवन सुखदाइ
, पर बच्चे भूल ही जाते हैं,
यह कैसी आँधी है आई.

4.तीन लकीरें
पिता, माथेसे तम्हारेये… तीन लकीरें कैसे हटाऊँ?
क्या वक्त रोक,… मुमकिन नहीं है….
क्या बदलदसमाज… येरीति, ये रिवाज़… वह कठिन है…
क्या तोड़, कायदे, ये नियमये वायदे… हाँ की तुमसे आशा नहीं है…
तो… क्या जहाँ छोड़ दूँ… पर बेटी तुम्हारी बुजदिल नहीं है|
तुम जोसुझाओ, वही कर जाऊं, कहो न पिता… माथेसे तुम्हारे… येतीन लकीरें, कैसे हटाऊँ?

5.मेरा साहस मेरी इज्जत मेरा सम्मान है पिता मेरी ताकत मेरी पूंजी मेरी पहचान है पिता
घर की एक-एक ईद में शामिल उनका खून पसीना सारे घर की रोनक उनसे सारे घर की शान पिता
मेरी इज्जत मेरी शोहरत मेरा रुतबा मेरा मान है पिता मुझको हिम्मत देने वाले मेरा अभिमान है पिता
सरे रिश्ते उनके दम से सारी बाते उनसे है सारे घर के दिल की धड़कन सारे घर की जान पिता
शायद रब ने देकर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का उसकी रहमत उसकी नियामत उसका है वरदान पिता


जिससे सब कुछ पाया है, जिसने सब कुछ सिखलाया है
कोटि नम्न ऐसे पापा को, जो हर पल साथ निभाया है। प्यारे पापा के प्यार भरे सीने से
जो लग जाते हैंसच्च कहती हूँ विश्वास करो, जीवन में सदा सख पाते है

मेरे प्यारे प्यारे पापा मेरे दिल में रहते पापा
मेरी छोटी सी ख़ुशी के लिए सब कुछ सह जाते है पापा
पूरी करते हर मेरी इच्छा उनके जैसा नही कोई अच्छा
मुम्मी मेरी जब भी डांट मुझे दलारते मेरे पापा मेरे प्यारे प्यारे पापा।

1.पूरे घर की संभाले कमान बात मन की जो ले जान
अपनी खुद की सुध छोड़ जो रखे सबका पूरा ध्यान वो पिता ही है श्रीमान
पल-पल हर पल अपनों की खुशियों की खातिर
अंगारों पे चल-चल करता रहता जो श्रम संधान
वो पिता ही है श्रीमान
मांगे सबकी वह पूरा करता
पर कभी ना आँहें भरता सबके चेहरे पर लाता जो
एक प्यारी-सी मुस्कान वो पिता ही है श्रीमान
गम का घुट पीया अकेले सबकी मुसीबत जो अपने सर ले ले
टूटता जुड़ता संभलता हर दिन देता नया इम्तिहान
वो पिता ही है श्रीमान
बूंद नहीं आंसू के आँखों पर
अन्दर उमड़ रहा समंदर सुना ना पाए सबको
अपनी जो व्याकल मन की गान
वो पिता ही है श्रीमान

3.पिता
माँ घर का गौरव तो पिता घर का अस्तित्व होते हैं।माँ के पास अश्रुधारा तो पिता के पास संयम होता है।”
दोनो समय का भोजन माँ बनाती है तो जीवन भर भोजन की
व्यवस्था करने वाले पिता को हम सहज ही भूल जाते हैं। कभी लगी जो ठोकर या चोट तो “ओ माँ”
ही मुंह से निकलता है। | लेकिन रास्ता पार करते कोई ट्रक
पास आकर बेक लगाये तो “बाप रे” यही मुंह से निकलता है।
क्योंकि छोटे छोटे संकटो के लिए माँ हैं पर बडे
संकट आने पर पिता ही याद आते हैं। पिता एक पट वृक्ष हैं
जिसकी शीतल छाँव में सम्पूर्ण परिवार सुख से रहता है।

4.”पापा तुम कितने अच्छे हो किन शब्दों में करूँ तुम्हारा
धन्यवाद शब्द नहीं मिल रहे मुझे शब्दों में है वाद विवाद”
आज जो मैंने सीखा है, जीवन से वह है तुम्हारा आशीर्वाद
चाहे मैं कितने, सुन्दर शब्दों को चुन लू॥
न कर पाउगी,
तुम्हारा धन्यवाद पापा तुम कितने अच्छे हो॥

5.पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।
पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।
पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी हैसबको बराबर का हक दिलाता यही एक महारथी है,
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।
पिता जमीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है
ए संदीप पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।

6.हर घर में होता है वो इंसान जिसे हम पापा कहते है।
सभी की खुशियों का ध्यान रखते हर किसी की इच्छापूरी करते
खुदगरीब और बच्चों को अमीर बनाते
जिसे हम पापा कहते है।
बड़ों की सेवा भाई-बहनों से लगाव पत्नी को प्यार, बच्चों को दुलार
खोलते सभी ख्वाहिशों के द्वार जिसे हम पापा कहते है।
बेटी की शादी, बेटों को मकान बहुओं की खुशियां, दामादी कामान
कुछ ऐसे ही सफर में गुजारे वो हर शाम
जिसे हम पापा कहते है।


मखर कर उन्मेष को,
उत्कर्ष की तरफ प्रयत्न कर उखाड़ दे,
हर मायूसी की बर्फ।
ये तूफान ही रास्ता बनाएँगे
बस जान लेना वक़्त रहते रास्तों का, मिजाज पहचान लेना।

माँ ममता का सागर है,
पर उसका किनारा हैं पिताजी।
माँ से ही बनता घर है,
पर घर का सहारा हैं पिताजी।
माँ आँखों की ज्योति है,
पर आँखों का तारा हैं पिताजी।
माँ से स्वर्ग,
मा से वैकण्ठ,
माँ से ही हैं चारों धाम
पर इन सबका द्वारा हैं पिताजी।


Long and Short Hindi Poems on father

1.”पिता”
मेरा साहस, मेरी इज्जत , मेरा सम्मान है पिता।
मेरी ताकद, मेरी पूँजी, मेरा अहसास है पिता।।
घर के एक-एक ईंट में शामिल उनका खून-पसीना।
सारे घर की रौनक, सारे घर की शान है पिता।।
मेरी इज्जत, मेरी शोहरत, मेरा रुतबा, मेरा मान है पिता।
मुझको हिम्मत देने वाले मेरे अभीमान है पिता।।
सारे रिश्ते उनके दम से, सारे नाते उनसे है।
सारे घर के दिल की धड़कन, सारे घर की जान पिता।।
शायद रब ने देकर भेजा फल ये अच्छे कर्मों का।
उसकी रहमत, उसकी नेअमत, उसका वरदान है पिता।।

2.उंगली को पकड़ कर सिखलाता, जब पहला कदम भी नहीं आता।
नन्हे प्यारे बच्चे के लिए, पापा ही सहारा बन जाता।
पापा हर फर्ज निभाते, जीवन भर कर्ज चुकाते।
बच्चे की एक खुशी के लिए, अपने सुख भूल ही जाते
प्यारे पापा के प्यार भरे, सीने से जो लग जाते है।
सच्च कहती हूँ विश्वास करो, जीवन में सदा सुख पाते है।।

3.मैं पतंग,
पापा है डोर पढ़ा लिखा चढ़ाया आकाश की ओर,
खिली काली पकड़ आकाश की ओर,
जागो, सुनो, कन्या भ्रूण हत्यारों,
पापा सूरज की किरण का शोर,
मैं बनू इंदिरा सी,
पापा मेरे नेहरू बने,
बेटियों के हत्यारों,
अब तो पाप से तौबा करो,
पापा सच्चे, बेहद अच्छे,
नेहरू इंदिरा से वतन भरे,
बेटियां आगे बेटो से,
पापा आओ पाक एलान करो,
देवियों के देश भारत की जग में,
ऊंची शान करें !

4.जिस शख़्स के माथे पे उठी लकीरों
में समाया होता है
जिन्दगियों का भार पर
जबां से उफ तक नहीं निकलती,
उस शख्सियत को
शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है
शायद इसलिए पिता पर कविता लिख पाना मुश्किल है।
जिसके ह्रदय से छलका प्रेम न तो आँखों
से पानी बन बरसता है न अल्फाजों का
सहारा ले निकलता है
उस प्रेम को परिभाषित कर पाना मश्किल है ।
शायद इसलिए पिता पर कविता लिख पाना मुश्किल है।
जिसकी चिंताएं आर्थिक धागे से बुने
सामाजिक गोटे से टके मयार्दाओं की गाँठ
में बंधकर भी होठों पे मुस्कान और बोलों पे आशीष
को रोक नहीं पातीं उस चिंता की व्यथा
में बिखरी मुस्कान को
समझ पाना भी मुश्किल है शायद इसलिए
पिता पर कविता लिख पाना मुश्किल है।

5.प्यार का सागर ले आते फिर चाहे कुछ न कह पाते बिन बोले ही समझ जाते
दुःख के हर कोने में खड़ा उनको पहले से पाया छोटी सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सीखाया जीवन के हर पहलु को अपने अनुभव से बताया हर
उलझन को उन्होंने अपना दुःख समझ सुलझाया
दूर रहकर भी हमेशा प्यार उन्होंने हम पर बरसाया
एक छोटी सी आहट से मेरा साया पहचाना, मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया आशिर्वाद उनका हमेशा हमने पाया

6.जब मै सुबह उठा तो कोई बहुत थक कर भी काम पर जा रहा था
वो थे पापा जब मम्मी डांट रही थी
तो कोई चुपके से हँसा रहा था वो थे
पापा ये दुनियाँ पैसो से चलती है पर
कोई सिर्फ मेरे लिए पैसे कामये जा रहा था

7.मैं इंदिरा पापा नेहरू
मैं पतंग पापा है डोर पढ़ा लिखा चढ़ाया आकाश
की ओर खिली कली पकड़ आकाश की छोर
जागो, सुनो, कन्या भ्रण हत्यारो
पापा सूरज की किरप का शोर मैं बनू इंदिरा सी.
पापा मेरे नेहरू बने बेटियों के हत्यारो, अब तो पाप से
तौबा करो पापा सच्चे, बेहद अच्छे, नेहरू इंदिरा से वतन
भरे बेटियां आगे बेटों से. पापा आओ पाक ऐलान
करो देवियों के देश भारत की जग में, ऊंची शान करे
रजनी विजय सिंगला

8.मैं बरसों बाद अपने घर को तलाश करता हुआ
अपने घर पहुंचा
लेकिन मेरे घर में अब मेरा घर कहीं नहीं था
अब मेरे भाई अजनबी औरतों के
शौहर बन चुके थे
मेरे घर में
अब मेरी बहनें अनजान मर्दो के
साथ मुझसे मिलने आती थीं
अपने अपने दायरों में तहसीन
मेरे भाईबहन का प्यार अब सिर्फ
तोहफों का लेनदेन बन चुका था
मजब तकबहा रहा
शेव करने के बाद नश, कीम
, सेफ्टीरेजर खुद धोकर अटैची में रखता रहा
मैले कपड़े खुद गिन कर लोड्री में देता रहा
अब मेरे घर में
वो नहीं थे जो बहुत सों में बंट कर भी
पूरे के पूरे मेरे थे जिन्हें मेरी हर खोई चीज़ का पता याद था
मुझे काफी देर हो गई थी देर हो जाने पर
हर खोया हुआ घर आस्मां का सितारा बन जाता है।
जो दूर से दुलाता है लेकिन पास नहीं आता है


9.प्यार का सागर ले आते फिर चाहे कुछ न कह पाते बिन बोले ही समझ जाते
दुःख के हर कोने में खड़ा उनको पहले से पाया छोटी सी उंगली पकड़कर
चलना उन्होंने सीखाया जीवन के हर पहलु को अपने अनुभव से बताया हर
उलझन को उन्होंने अपना दुःख समझ सुलझाया
दूर रहकर भी हमेशा प्यार उन्होंने हम पर बरसाया एक छोटी सी आहट से
मेरा साया पहचाना, मेरी हर सिसकियों में
अपनी आँखों को भिगोया आशिर्वाद उनका हमेशा हमने पाया


Hindi Poem on Father

कुबेर तो नहीं कुबेर सा खजाना है पाया
आसमान तो नहीं आसमाना शहे. पापा
पहलवान तो नहीं पहलवान मेक, पाणा
सदा तो नहीं फिर भी हर ख्याहिश पूरी करते हैं. पापा
गौनाम पद तो नहीं फिर भी हर गलती की माफी दो हैं पापा
महर्षि दधिची तो नहीं फिर भी हमारे लिए अपने मुख त्यागने है ,पापा
जज से हैं फिर भी फैसला नहीं, सलाह सुनाते हैं, पापा
जेलर येई फिर भी मजा से नहीं पार से समझाते हैं पापा ।

Conclusion:

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