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Bhagwat Geeta in Hindi and English Pdf

कई वर्षों पहले जब कौरवों और पांडवों में घमासान युद्ध छिड़ गया था तब श्री कृष्ण ने पांडवों का साथ देने का निर्णय लिया इस युद्ध के दौरान वे अर्जुन के मार्गदर्शक और साथ ही बने परंतु जब अर्जुन अपने ही भाइयों के विरुद्ध लड़ाई करने से कतरा रहे थे

तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सही और गलत का पाठ पढ़ाया उनके इस पाठ में केवल अर्जुन को ही नहीं बल्कि सभी लोगों को प्रेरित किया भगवत गीता कृष्णा और अर्जुन के बीच हुए संवाद ओं का काव्यात्मक वर्णन है आइए जानते हैं कि भगवद्गीता कैसे हमें हमारे जीवन में सही राह पर चलने के लिए मार्गदर्शन करती है

शरीर नश्वर है और आत्मा अविनाशी

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हमारे शरीर को तो मारा जा सकता है परंतु हमारी आत्मा को नहीं इसे स्पष्ट रूप में समझाने के लिए उन्होंने एक कपड़े का उदाहरण दिया है वे कहते हैं कि जैसे कपड़े फट जाने के बाद उनकी जगह नए कपड़े ले लेते हैं ठीक उसी तरह जब मनुष्य की मृत्यु होती है तब उसकी आत्मा और शरीर को छोड़ देती है और नए शरीर में प्रवेश करती है

भय ना रखें

मनुष्यो को सबसे ज्यादा डर होता है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जब इंसान अपने मन से भय निकाल देता है तब वह तनाव मुक्त जिंदगी जी सकता है

क्रोध इंसान को भ्रमित करता है

इंसान की सभी कमजोरियों में से एक है क्रोध जब इंसान क्रोधित होता है तो वह अपना आपा खो बैठा है वह सही गलत की पहचान नहीं कर पाता और क्रोधित होकर अपने आप को हानि पहुंचाता है

संदेह ना करें

क्रोध और भय के अलावा अगर मनुष्य का कोई सबसे बड़ा शत्रु है तो वह है संदेह व्यक्ति अपनी काबिलियत पर शक करता है वह कभी कामयाबी हासिल नहीं कर सकता और इसीलिए उसे अपनी काबिलियत पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए

हमेशा संयम रखें

इंसान अगर अपने जीवन की गतिविधियों को संभाल नहीं पाता तो वह अपने कार्य से भटक जाता है इस वजह से उसे इतना से जूझना पड़ता है परंतु अगर वह कुछ समय निकालकर ध्यान करें तो उसे अपनी परेशानियों को दूर करने के कई सारे उपाय मिल जाते हैं और वह अपने मन पर काबू पा सकता है

अपनी इच्छाओं पर काबू पाए

मनुष्य का मन कभी स्थिर नहीं होता उसके मन में हमेशा भावनाओं और इच्छाओं का निर्माण होता रहता है वह हमेशा कुछ ना कुछ इच्छा रखता है भले ही वह खुद से हो या किसी और से और यह इच्छाएं कभी भी निराशाजनक साबित हो सकती है इसलिए मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए मन की स्थिरता से ही मनुष्य अपनी इच्छाओं पर काबू पा सकता है

स्वार्थी ना बने

जब इंसान स्वार्थी बन जाता है तब हकीकत को समझना उसकी क्षमता से बाहर हो जाता है वह अपने स्वार्थ के कारण परिस्थितियों को स्पष्ट रूप से देख नहीं पाता और अपना नुकसान कर बैठता है

जो होता है अच्छे के लिए होता है

जब कुछ बुरा होता है तब हम उसे लेकर बहुत चिंतित होते हैं या फिर भविष्य में होने वाली परिस्थितियों को लेकर चिंता करते हैं इस पर भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जो हुआ अच्छा के लिए हुआ जो हो रहा है अच्छे के लिए हो रहा है और जो होगा अच्छे के लिए ही होगा

अपने कर्तव्यों से ना भागे

इंसान के जन्म लेते ही जीवन के नैतिक कर्तव्यों से जुड़ जाता है अपने जीवन काल में उसे इन कर्तव्यों को पूरा करना चाहिए और उनसे भागना नहीं चाहिए

कर्म करो फल की चिंता मत करो

इंसान अपने कार्य को करते समय पहले उससे मिलने वाले फल के बारे में सोचता है इसी वजह से वह अपने कार्य पर ध्यान केंद्रित नहीं रख पाता वह अपनी काबिलियत से कम काम करता है और फल पाने की चिंता में उसे अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होता इसलिए श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और उसके बदले मिलने वाले फल की चिंता नहीं करनी चाहिए

मनुष्य अगर इन सभी बातों का पालन करता है तो वह एक संतुलित जीवन व्यतीत करता है

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Conclusion:

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